Monday, 20 October 2014

सोनागाछी का 'छी '

तुम्हारे शहर में 
बस एक चीज़ थी 
जिसकी परछाई नहीं बनती थी 
कभी ज़मीन पर,
नीचे बहती नदी में 
पुल से छूट कर गिरना 
पुल की परछाई का 
हर बार ख़ुदकुशी ही लगी 
एक बार भी नहीं लगा
कि जिस पुल का कैंटलीवर 
पूरा शहर संभाल सकता था 
सिवाय अपनी परछाई के 
उसी पुल पर 
तुम भी तो खड़ी थी..... 

( 12 मई 2014 )