ख़ानाबदोश
आज की रात
मेरे होठों पर होठों के
निशान रहने दो
मेरी बाँहों में बाँहों का
तनाव रहने दो
मेरी ऊँगलियों में गेसुओं की
उलझन रहने दो
मेरी सांसों में तुम्हारी ख़ामोश
आहें रहने दो
मेरी आँखों में मजबूरी का
इतिहास रहने दो
एक पूरी सदी को एक
अधूरी रात रहने दो
मेरे भीतर तुम ख़ुद को रहने दो,
आज की रात मुझमें
रात रहने दो !
(13 जून 2008)