Thursday, 6 June 2013

ख़ानाबदोश 


आज की रात
मेरे होठों पर होठों के
निशान रहने दो

मेरी बाँहों में बाँहों का
तनाव रहने दो

मेरी ऊँगलियों में गेसुओं की
उलझन रहने दो

मेरी सांसों में तुम्हारी ख़ामोश
आहें रहने दो

मेरी आँखों में मजबूरी का
इतिहास रहने दो

एक पूरी सदी को एक
अधूरी रात रहने दो

मेरे भीतर तुम ख़ुद  को रहने दो,
आज की रात मुझमें
रात रहने दो !

(13 जून 2008)

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