Wednesday, 22 May 2013

स्वागत 


सावधान !
मेरी दुनिया में
सपनों से बाहर निकलना मना है
और किसी भी नर्म दिल के लिए
अनाधिकार प्रवेश वर्जित नहीं है .

वे वापस लौट जाएँ
जो इन्सान को चेहरे से पहचानते हैं;
यहाँ सबके चेहरे धुएँ से बने हैं,
जले हुए रिश्तों और
भस्म हो चुके विश्वास के धुएँ से . . .

इसलिए जो सच्चा अभिनय कर सकते हैं -
हँसने का,
रोने का,
मरने का,
और पूरी लापरवाही से ज़िम्मेदार बनने का,
उनका स्वागत है . . .

(30 नवम्बर 2006)

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