अंतिम आग्रह
देख रहा हूँ
चलने के लिए
जूते ज़रूरी हो गए हैं
पैरों से ज़्यादा . . .
रास्तों से ज़्यादा
जूतों में ही छिपे हैं
पैरों के निशान . . .
जैसे उन्हें ही तय करना हो
कि जाना कहाँ है ?
जूतों पर
सिर्फ़ दाम लिखे होते हैं
उनकी उम्र नहीं
हमें याद रखना चाहिए
और भूलना नहीं चाहिए
कि जूते उठा सकते हैं
आदमी का वजन
आदमी के सपनों का नहीं;
थके हुए जूते नहीं
अंतिम आग्रह
थके हुए पैर ही सुन सकते हैं !
(02 मार्च 2013)
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