अजनबी खुशबूओं के रंग
अजनबी खुशबूओं वाली
तुम्हारी यह उम्र
मेरे नथुनें
अब नहीं पहचानते !
बालों में उलझी
ख़ुशबू
शैम्पू की,
होठों से लिपटा
लिपस्टिक का गंध,
आँखों से उठता
काला धुआँ
काजल का
और पोर-पोर बंद
चेहरे का
किसी क्रीम की
सात परतों से . . .
ऊँगलियों से पैरों तक
क़ैद है
तुम्हारी ख़ुशबू
किसी सस्ते नेलपॉलिश के
ठण्डे जमे हुए रंग में;
ऐसे में ढूँढ़ता हूँ
तुम्हारी ख़ुशबू
किसी पुराने एलबम से उठती
पहली सिगरेट से पहले वाली
तुम्हारी
खाँसी में . . .
(27 फ़रवरी 2015)
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